माता-पिता सम्मान एवं संस्कार जागरूकता सह स्टेशनरी वितरण कार्यक्रम आयोजित
रांची : जोहार लॉर्ड बुद्धा फाउंडेशन के तत्वावधान में “माता-पिता सम्मान एवं संस्कार जागरूकता सह स्टेशनरी वितरण कार्यक्रम” का आयोजन वीर बिरसा नगर, रांची स्थित श्री रामप्रवेश बाल संस्कार केंद्र में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में माता-पिता, दादा-दादी एवं परिवार के बुजुर्गों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता, सेवा-भाव एवं जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के साथ उनकी शिक्षा में सहयोग प्रदान करना था।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि पूर्व सेंट्रल एक्सआईएसएस के शंकर प्रसाद जी, विशिष्ट अतिथि सरला बिरला स्कूल, राँची की पूर्व शिक्षिका सुजाता साहू, झारखंड हाईकोर्ट, रांची के अधिवक्ता आकाश कुमार गुप्ता एवं पीएनबी बैंक की मैनेजर श्रुति कुमारी ने भारत माता एवं स्वामी विवेकानंद के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित एवं पुष्प अर्पित कर किया। इस अवसर पर जोहर लॉर्ड बुद्धा फाउंडेशन के सीईओ डॉ. भारत भूषण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत में फाउंडेशन के सीईओ डॉ. भारत भूषण ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित लोगों का स्वागत किया तथा कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कार देना भी आवश्यक है। कार्यक्रम के दौरान बच्चों एवं उपस्थित लोगों को माता-पिता के प्रति सम्मान और कृतज्ञता, दादा-दादी एवं परिवार के बुजुर्गों का सम्मान, अपने पूर्वजों की स्मृति एवं उनके योगदान को याद करने, भारतीय पारिवारिक एवं सामाजिक संस्कारों को बनाए रखने तथा बच्चों में सेवा, विनम्रता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का संदेश दिया गया। उन्होंने “माता-पिता की सेवा ही सर्वोच्च संस्कार है” के भाव को भी बच्चों के सामने रखा।
इसके बाद सभी अतिथियों ने विषय से संबंधित अपने विचार बच्चों के साथ साझा किए। झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता आकाश कुमार गुप्ता ने माता-पिता की सेवा को सर्वोच्च संस्कार बताते हुए कहा कि बच्चों को अपने माता-पिता के प्रति सदैव सम्मान और सेवा का भाव रखना चाहिए।
श्रुति कुमारी ने बच्चों में सेवा, प्रेम और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि परिवार के प्रति जिम्मेदारी और बुजुर्गों का सम्मान बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विशिष्ट अतिथि सुजाता साहू ने माता-पिता के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता तथा दादा-दादी और परिवार के बुजुर्गों के सम्मान पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बच्चों से अपनी संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को नहीं भूलने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शंकर प्रसाद जी ने अपने पूर्वजों की स्मृति एवं उनके योगदान को याद करने तथा भारतीय पारिवारिक एवं सामाजिक संस्कारों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपनी पत्नी को याद करते हुए कहा कि जो लोग आज हमारे बीच नहीं हैं, उनके सम्मान और स्मृति में भी इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनके नहीं रहने के बाद भी यदि उनके संस्कार और स्मृतियां बच्चों एवं समाज के बीच जीवित रहें, तो यह उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
अपनी पत्नी की पुण्यतिथि के अवसर पर शंकर प्रसाद जी ने श्री रामप्रवेश बाल संस्कार केंद्र के बच्चों के बीच स्टेशनरी सामग्री का वितरण किया। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी को बच्चों से बहुत प्यार था और उनका सपना था कि हर बच्चा पढ़े-लिखे, आगे बढ़े और अपने जीवन में सफलता प्राप्त करे। इसी भावना के साथ बच्चों के बीच स्टेशनरी सामग्री का वितरण किया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में सावित्री कुमारी, अंजली कुमारी एवं चरवा भगत का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में बाल संस्कार केंद्र के बच्चे एवं अन्य उपस्थित लोग शामिल हुए।
















